राष्ट्रपति शासन के एक वर्ष बाद 4 फरवरी को मणिपुर में नई सरकार का गठन हुआ। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह (मैतेई) के साथ दो उपमुख्यमंत्री नियुक्त किए गए— नेमचा किपगेन (कुकी-जो) और लोसी डिखो (नागा)। इस कदम को राज्य के तीन प्रमुख समुदायों को प्रतिनिधित्व देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
मणिपुर की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं नेमचा किपगेन ने कहा कि राज्य में जहां हिंसा के घाव अभी भी गहरे हैं, वहां बफर जोन की व्यवस्था जारी रखने की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने कहा कि जैसे एक “स्नेही मां शांतिपूर्ण घर का पालन-पोषण करती है”, उसी भावना और जिम्मेदारी के साथ वह मणिपुर की सेवा करना चाहती हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके पदभार ग्रहण करने के बाद कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए। इस पर उन्होंने कहा कि वह लोगों की भावनाओं का सम्मान करती हैं, लेकिन यह निर्णय सद्भावना और दीर्घकालिक जिम्मेदारी की भावना से लिया गया है, न कि किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण।
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वर्तमान में नेमचा किपगेन कांगपोकपी में हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से शपथ ली थी। अभी तक उन्हें कोई विभाग आवंटित नहीं किया गया है और न ही उन्होंने इम्फाल जाकर औपचारिक रूप से पदभार संभाला है या विधानसभा सत्र में भाग लिया है।
गौरतलब है कि 3 मई 2023 को कुकी-जो और मैतेई समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए थे। इस हिंसा के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।
नई सरकार के गठन के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य में शांति और सामंजस्य बहाल करने के प्रयास तेज होंगे।
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