केंद्र सरकार का गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के मुद्दे पर कानून बनाने की संभावना पर विचार कर रहा है। इस संबंध में मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) में एक हलफनामा दाखिल कर जानकारी दी है।
हलफनामे में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद यह कदम उठाया जा रहा है, जिसमें अदालत ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) रैंक तक के आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को “क्रमिक रूप से कम” करने की बात कही थी। अदालत के निर्देशों के बाद सरकार इस विषय पर “वैधानिक हस्तक्षेप” की संभावना पर विचार कर रही है।
वैधानिक हस्तक्षेप का मतलब है कि इस मुद्दे पर एक नया कानून बनाया जा सकता है। इस प्रस्तावित कानून के तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (Central Armed Police Forces) में ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ‘ए’ सर्विस (OGAS) का दर्जा देने की भी योजना शामिल है। इससे इन बलों के अधिकारियों के कैरियर ग्रोथ और पदोन्नति के अवसरों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
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गृह मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा कि यह कदम प्रशासनिक सुधार और सेवा संरचना को अधिक संतुलित बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। लंबे समय से CAPF अधिकारियों की ओर से मांग की जा रही थी कि उन्हें भी अन्य संगठित ग्रुप ‘ए’ सेवाओं की तरह समान दर्जा और अवसर मिले।
यदि यह कानून लागू होता है, तो केंद्रीय सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति व्यवस्था, पदोन्नति प्रणाली और प्रशासनिक संरचना पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। सरकार इस मामले में सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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