मिजोरम के मंत्री लालनीलावमा ने सोमवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के नेतृत्व से मुलाकात की और राज्य में फैले अफ्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ) को ‘आपदा’ घोषित करने की मांग रखी। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करना और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की रणनीति पर चर्चा करना था।
मंत्री लालनीलावमा ने एनडीएमए अधिकारियों के सामने मिजोरम में अफ्रीकी स्वाइन फीवर से पशुपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को उठाया। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के कारण बड़ी संख्या में सूअरों की मौत हुई है, जिससे किसानों और पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने केंद्र से इस संकट को गंभीरता से लेते हुए इसे आपदा की श्रेणी में शामिल करने का आग्रह किया।
बैठक के दौरान मिजोरम की भौगोलिक स्थिति और आपदा संबंधी चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य भूकंप, भूस्खलन, जंगलों में आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। इसलिए राज्य में आपदा पूर्व तैयारी, राहत व्यवस्था और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत है।
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मंत्री ने राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार से अधिक सहयोग और तकनीकी सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और पशु रोगों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
एनडीएमए नेतृत्व के साथ हुई इस बैठक को मिजोरम में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार लगातार अफ्रीकी स्वाइन फीवर के प्रसार को रोकने और प्रभावित पशुपालकों को सहायता पहुंचाने के लिए प्रयास कर रही है।
अफ्रीकी स्वाइन फीवर एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो घरेलू और जंगली सूअरों को प्रभावित करती है। हालांकि यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती, लेकिन इसके कारण पशुधन और संबंधित उद्योगों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। मिजोरम सरकार का कहना है कि इसे आपदा घोषित करने से प्रभावित लोगों को राहत और सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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