चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की आगामी मुलाकात से पहले भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। चीन ने कहा कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को उचित तरीके से संभालते हुए सहयोग बढ़ाना चाहिए।
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने शुक्रवार को शी चिनफिंग की भारत यात्रा से पहले कहा कि चीन ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को काफी महत्व देता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के सदस्य खुलेपन, समावेशिता और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग की भावना को आगे बढ़ा रहे हैं।
माओ निंग ने कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन को लागू करना चाहता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, संवाद बढ़ाना चाहिए और मतभेदों को सही तरीके से संभालना चाहिए।
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उन्होंने ब्रिक्स को उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के बीच एकजुटता और सहयोग बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया। उनके मुताबिक, ब्रिक्स बहुपक्षवाद, निष्पक्षता, न्याय और साझा विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा ग्लोबल साउथ की प्रमुख ताकत बन चुका है।
शी चिनफिंग शनिवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। करीब सात साल बाद उनकी यह पहली भारत यात्रा होगी। इस दौरान वह 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे।
मोदी और शी की यह तीसरी मुलाकात होगी। इससे पहले दोनों नेता रूस के कजान और चीन के तियानजिन में मिल चुके हैं। यह बैठक 2020 के पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी संघर्ष के बाद बिगड़े भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ब्रिक्स की स्थापना में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब इसके विस्तार में शामिल हुए। इंडोनेशिया 2025 में सदस्य बना। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली।
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