पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद की रहने वाली और सीपीएम से जुड़ी मोस्तारी बानो ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने “लाइमलाइट चुरा ली।” बानो का दावा है कि इस मामले में वह मूल याचिकाकर्ता हैं और उनकी याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को चुनाव आयोग को निर्देश जारी किए थे।
मोस्तारी बानो ने कहा कि जब 4 फरवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं, तो राजनीतिक चर्चा का पूरा ध्यान उनकी ओर चला गया, जबकि इस मामले की शुरुआत उन्होंने की थी। बानो का कहना है कि वह लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं और उन्होंने ही चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को अदालत के सामने रखा था।
सीपीएम से जुड़ी बानो ने आरोप लगाया कि उनकी भूमिका को नजरअंदाज किया गया और मुख्यमंत्री की उपस्थिति के कारण उनकी याचिका की अहमियत कम करके दिखाई गई। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा है, इसलिए इसमें सभी पक्षों की भूमिका को स्वीकार किया जाना चाहिए।
और पढ़ें: जापान में आम चुनाव शुरू, पीएम सानाए ताकाइची को बड़ी जीत की उम्मीद
यह मामला विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) से संबंधित है, जिसके तहत मतदाता सूची की समीक्षा और सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे सकता है। सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस के बीच पहले से ही तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा है और इस मुद्दे ने दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी और बढ़ने की संभावना है।
और पढ़ें: तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन मजबूत, 2026 चुनाव से पहले रार से इनकार