मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रशासन को जनता के और करीब ले जाने के उद्देश्य से एक नई पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में हर शुक्रवार को ‘नो मीटिंग डे’ के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन मंत्री, विधायक और अधिकारी कार्यालयों में बैठकों के बजाय सीधे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनेंगे और उनका समाधान करेंगे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह अभियान छिंदवाड़ा से शुरू किया। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह पहल चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सरलता। इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाना तथा सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक तेजी से पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की समस्याओं को समझने के लिए अधिकारियों का मैदान में जाना जरूरी है। केवल कार्यालयों में बैठकर प्रशासन चलाने के बजाय लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने से वास्तविक समस्याओं की जानकारी मिल सकेगी और उनका बेहतर समाधान किया जा सकेगा।
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‘नो मीटिंग डे’ के दौरान मंत्री, विधायक और सरकारी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों से मिलेंगे। वे स्थानीय समस्याओं, शिकायतों और जनहित से जुड़े मुद्दों की जानकारी लेंगे और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रशासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाना है। जनता और सरकार के बीच दूरी कम करने के लिए इस तरह की पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मध्य प्रदेश सरकार लगातार सुशासन और जनसेवा को प्राथमिकता देने की बात कहती रही है। मुख्यमंत्री की इस नई पहल को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में सक्रिय रहने से स्थानीय स्तर पर समस्याओं का जल्द समाधान होने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि जनता के साथ सीधा संवाद बढ़ने से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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