म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग शनिवार को बिहार के बोधगया पहुंचे। उनकी इस यात्रा को भारत और म्यांमार के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने राष्ट्रपति के आगमन का स्वागत करते हुए दोनों देशों के बीच गहरे आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और जन-से-जन संबंधों पर प्रकाश डाला।
बोधगया हवाई अड्डे पर म्यांमार के राष्ट्रपति का स्वागत बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने किया। आगमन के बाद राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने महाबोधि मंदिर के दर्शन किए, जो बौद्ध धर्म का एक प्रमुख तीर्थस्थल और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
30 मई से 2 जून तक चलने वाली यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है।
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विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरान दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा, संपर्क परियोजनाओं, व्यापार, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। रणधीर जयसवाल ने कहा कि भारत और म्यांमार के संबंधों से जुड़े सभी मुद्दे वार्ता का हिस्सा होंगे और दोनों देश अपनी ऐतिहासिक मित्रता को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
म्यांमार भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पड़ोसी देश है। दोनों देशों के बीच लगभग 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो नागालैंड और मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी हुई है। इसलिए सीमा प्रबंधन और सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
1 जून को राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद वे नई दिल्ली में एक विशेष व्यापार मंच में हिस्सा लेंगे। यात्रा का समापन 2 जून को मुंबई में होगा, जहां वे उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और विभिन्न औद्योगिक स्थलों का दौरा करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, रक्षा और व्यापारिक संबंधों के विस्तार के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय इस यात्रा के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं।
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