केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों को केंद्र सरकार के राष्ट्रीय मान्यता (एक्रेडिटेशन) ढांचे के अंतर्गत लाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए एक समान और मजबूत मान्यता प्रणाली बेहद जरूरी है।
मंगलवार (13 जनवरी, 2026) को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद (NITSER) की 13वीं बैठक को संबोधित करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि तकनीकी शिक्षा का पाठ्यक्रम देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण, नवाचार और रोजगार सृजन से जोड़ा जाना चाहिए।
शिक्षा मंत्री ने “360 डिग्री पीएचडी सुधार” की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएचडी कार्यक्रमों को उद्योग-केंद्रित बनाया जाना चाहिए ताकि शोध का सीधा लाभ समाज और अर्थव्यवस्था को मिल सके। उनके अनुसार, वर्तमान समय में ऐसे शोध की आवश्यकता है जो उद्योग की समस्याओं का समाधान करे और उभरते हुए क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करे।
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श्री प्रधान ने सुझाव दिया कि नए और उभरते हुए जॉब रोल्स तथा 21वीं सदी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए उद्योग के नेतृत्व में पाठ्यक्रम समितियों का गठन किया जाना चाहिए। इससे छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा और वे रोजगार के लिए अधिक सक्षम बन सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय प्रत्यायन ढांचे के तहत आने से संस्थानों में गुणवत्ता सुधार, जवाबदेही और निरंतर मूल्यांकन को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारतीय तकनीकी संस्थान वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और विश्वसनीयता को और मजबूत कर सकेंगे।
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