हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने नशे के कारण युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ रहे असर पर गहरी चिंता जताई। जालंधर में बोलते हुए सैनी ने परविंदर सिंह गोटा की हत्या का भी जिक्र किया और कहा कि नशे की समस्या को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सुलझाना होगा।
पंजाब में परविंदर सिंह गोटा की हत्या और नशे की लगातार बनी हुई समस्या को लेकर पूछे गए सवाल पर सैनी ने राज्य सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उसकी कार्यप्रणाली की आलोचना की। पंजाब सरकार पर तंज कसते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा, "सरकार झूठ और चुटकुलों के बल पर बनी थी। चुटकुले काम नहीं आते, काम ही काम आता है।"
सैनी ने कहा कि पंजाब की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है, खासकर राज्य के युवाओं पर नशे के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं को नशे की लत से बाहर निकालने और अधिक परिवारों को इसके दुष्परिणामों से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
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पंजाब में युवाओं की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए सैनी ने कहा, "पंजाब की स्थिति यह हो गई है कि पंजाब के युवा नशे में भटक गए हैं, और नशे ने उन्हें गहराई में खींच लिया है। हमें उन्हें बचाने के लिए बड़े पैमाने पर काम करने की जरूरत है।"
हरियाणा के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने 2029 से पहले पंजाब को नशा मुक्त बनाने की बात कही थी। सैनी ने विश्वास जताया कि यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और इसके लिए सबको मिलकर काम करने की अपील की। अमित शाह की टिप्पणी का हवाला देते हुए सैनी ने कहा, "अमित शाह जी ने हाल ही में कहा था कि हम 2029 से पहले पंजाब को नशे से मुक्त कर देंगे, और हम ऐसा करके दिखाएंगे।"
उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि नशे की समस्या को राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, इसे एक भावनात्मक और सामाजिक मुद्दा बताते हुए कहा कि यह अनगिनत परिवारों को प्रभावित करता है। सैनी ने कहा, "वह जो कह रहे हैं, उसका मतलब यह है कि यह राजनीतिक मुद्दा नहीं है, और हमें इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।"
नशे के मानवीय नुकसान को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने युवाओं के माता-पिता और परिवारों द्वारा झेली जा रही भावनात्मक पीड़ा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नशे के परिणाम व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरे परिवारों को प्रभावित करते हैं। सैनी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पंजाब में नशे को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है और नशीले पदार्थों की तस्करी और लत के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।
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