राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – पार्ट 1’ में पहली बार विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन- एसआईआर) और 1975-77 के आपातकाल पर अलग-अलग अध्याय शामिल किए हैं। नई पुस्तक में भारत की चुनावी प्रक्रिया को दुनिया की सबसे व्यापक और प्रभावी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक बताया गया है।
पुस्तक के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना, मतदाता सूची तैयार करना तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाना है। एसआईआर पर दिए गए नए अध्याय में बताया गया है कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना, उसका सत्यापन करना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। एनसीईआरटी के अनुसार, इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो।
पुस्तक में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (स्पेशल समरी रिवीजन- एसएसआर) की प्रक्रिया भी समझाई गई है। इसमें बताया गया है कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े जाते हैं, जबकि मृत व्यक्तियों, पता बदलने वाले लोगों तथा एक से अधिक बार दर्ज नामों को हटाया जाता है। अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले आम जनता से दावे और आपत्तियां भी आमंत्रित की जाती हैं, ताकि किसी भी त्रुटि को समय रहते सुधारा जा सके।
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नई पुस्तक में चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए ईवीएम, वीवीपैट, आदर्श आचार संहिता और मतदाता जागरूकता अभियानों का भी उल्लेख किया गया है।
वहीं, ‘लोकतंत्र’ अध्याय के अंतर्गत 1975 से 1977 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र की प्रमुख चुनौतियों में से एक बताया गया है। पुस्तक में उल्लेख है कि उस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई थी और कई राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, 1977, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद गठित गठबंधन सरकारों का भी उल्लेख किया गया है।
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