नीट यूजी 2026 पुनर्परीक्षा केंद्र के बाहर एक भावुक घटना ने लाखों लोगों का ध्यान खींचा है। परीक्षा में केवल दो मिनट की देरी के कारण एक छात्रा को केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया, जिससे उसके पिता टूट गए और भावुक होकर रो पड़े।
जानकारी के अनुसार, छात्रा ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी महीनों तक की थी और यह परीक्षा उसके करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी। लेकिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के नियमों के अनुसार गेट बंद होने के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाता, जिसके चलते उसे बाहर ही रहना पड़ा।
यह घटना परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद अन्य अभिभावकों और छात्रों के सामने हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पिता ने अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाई और अपनी बेटी के भविष्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी का एक साल बर्बाद हो जाएगा।”
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घटना का वीडियो और विवरण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने परिवार के प्रति सहानुभूति जताई, जबकि कुछ ने परीक्षा नियमों की सख्ती पर सवाल उठाए।
हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा पिता के व्यवहार की हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती सदमे के बाद उन्होंने अपनी बेटी को दोष देने के बजाय उसे सांत्वना दी और हिम्मत बंधाई।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परीक्षाएं छात्रों पर अत्यधिक मानसिक दबाव डालती हैं। वहीं, परीक्षा प्राधिकरण का कहना है कि समय पर पहुंचना और नियमों का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि परीक्षा केवल अंक और रैंक नहीं होती, बल्कि इसके पीछे परिवारों की वर्षों की मेहनत, उम्मीद और त्याग भी जुड़ा होता है।
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