नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने तथा हिमस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ में अब तक 1003 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। करीब चार हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच, अब एक और संभावित खतरे ने चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के मुताबिक, नेपाल की छोचेन नदी में बने इम्पैक्ट क्रेटर के आसपास मौजूद हिमखंडों और बर्फ की चट्टानों के टूटने का खतरा अभी भी बना हुआ है। यदि बड़े हिमखंड अचानक टूटकर नदी में गिरते हैं, तो इससे दोबारा तेज बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
ड्रोन सर्वे में सामने आई अहम जानकारी
मंगलवार सुबह नेपाली समयानुसार 5:45 बजे लिए गए ड्रोन चित्रों से पता चला कि छोचेन नदी के इम्पैक्ट क्रेटर में जमा अधिकांश पानी बह चुका है। निचले इलाकों में नदी का बहाव भी सामान्य हो गया है। हालांकि, क्रेटर के आसपास हिमनदों और बड़े हिमखंडों के टूटने का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है।
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चीन के जलस्रोत मंत्रालय की रिपोर्ट नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने नेपाल सरकार के मौसम विभाग और बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा के साथ साझा की है।
इस बीच, बाढ़ में मृतकों की पहचान भी चुनौती बनी हुई है। पोखरा के एक सरकारी अस्पताल में रखे शव नंबर 1003 पर तीन परिवारों ने अपने-अपने परिजन का होने का दावा किया है। ऐसे में पहचान के लिए डीएनए जांच का सहारा लिया जा सकता है।
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