नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को बड़ा खुलासा किया है। गौतम बुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि यह पहले से रची गई एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि जांच में कई लोगों की भूमिका सामने आई है, जिनमें मनीषा चौहान, रूपेश राय और आदित्य आनंद प्रमुख नाम हैं। उन्होंने बताया कि रूपेश राय 2018 से और आदित्य आनंद 2020 से देशभर में विभिन्न घटनास्थलों पर सक्रिय रूप से घूमते रहे हैं और अक्सर अशांति वाले स्थानों पर दिखाई देते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि दो संदिग्ध एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे थे, जिनके जरिए भ्रामक जानकारी फैलाकर भीड़ को उकसाया गया। इसके साथ ही व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर मजदूरों को संगठित किया गया और QR कोड के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा गया।
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लक्ष्मी सिंह ने बताया कि 31 मार्च से 11 अप्रैल के बीच घटनाओं की पूरी योजना बनाई गई थी। 9 और 10 अप्रैल को व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए, 10 अप्रैल को प्रदर्शन हुआ और 11 अप्रैल को सड़क जाम कराने के लिए उकसाया गया।
पुलिस के अनुसार, हिंसा के बाद भी सोशल मीडिया पर झूठी जानकारी फैलाकर माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की गई। जांच में पाया गया कि कई मजदूर इन पोस्ट को देख रहे थे।
इस मामले में अब तक 62 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी आदित्य आनंद फरार है। पुलिस ने बताया कि कई आरोपी बाहरी राज्यों से आए थे और मजदूरों को भड़काने में शामिल थे।
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