ओडिशा के खोरधा जिले स्थित प्रसिद्ध चिलिका झील में शनिवार को लगी आग को कई घंटों की लगातार मशक्कत के बाद आखिरकार बुझा दिया गया। यह आग झील के एक हिस्से में अचानक भड़क उठी थी, जिससे आसपास के क्षेत्र में चिंता का माहौल पैदा हो गया था।
घटना की जानकारी मिलते ही वन्यजीव विभाग और अग्निशमन सेवा की टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया। आग पर काबू पाने के लिए कई घंटे तक संयुक्त अभियान चलाया गया, जिसमें फायर टेंडर और स्थानीय प्रशासन की मदद भी ली गई।
अधिकारियों के अनुसार, आग के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान के अनुसार यह सूखी घास और पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण तेजी से फैल गई। झील के आसपास का क्षेत्र जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिससे यह घटना और भी गंभीर हो गई।
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चिलिका झील एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झीलों में से एक है और यह प्रवासी पक्षियों तथा कई दुर्लभ प्रजातियों का प्रमुख आवास स्थल है। ऐसे में आग लगने की घटना ने पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों को चिंता में डाल दिया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है और अब स्थिति सामान्य है। हालांकि, क्षेत्र में निगरानी जारी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा की आवश्यकता को उजागर किया है।
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