ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का पुरी में भव्य स्वागत किया गया, जो पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर से ‘धाम’ शब्द हटाने के फैसले के बाद हुआ। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह कदम एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
बयान में कहा गया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने दीघा में हाल ही में बने जगन्नाथ मंदिर के नाम से ‘धाम’ शब्द पूरी तरह हटाने पर सहमति जताई है। इस फैसले को ओडिशा के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पुरी स्थित श्री जगन्नाथ धाम को परंपरागत रूप से एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
इसी उपलब्धि के बाद जब मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी पुरी पहुंचे, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें सम्मानित किया और इस निर्णय को राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की जीत बताया।
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मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम दोनों राज्यों के बीच संवाद और समन्वय का परिणाम है, जिससे धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर एक संतुलित समाधान निकाला गया।
पुरी में आयोजित स्वागत कार्यक्रम के दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री के समर्थन में नारे लगाए और कहा कि यह निर्णय ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के निर्णय क्षेत्रीय सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए लिए जाते हैं, जिससे राज्यों के बीच बेहतर समझ और सहयोग को बढ़ावा मिलता है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी लोगों का आभार व्यक्त किया और कहा कि सरकार राज्य की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेगी।
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