ओडिशा के मयूरभंज जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी शिक्षक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी मौत का कारण घर-घर जाकर किए जा रहे जनगणना कार्य का अत्यधिक दबाव था।
यह घटना सोमवार को सामने आई, जब शिक्षक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें बचाया नहीं जा सका। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शिक्षक को जनगणना से जुड़े डोर-टू-डोर सर्वे कार्य की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसमें उन्हें लगातार फील्ड में जाकर डेटा एकत्र करना पड़ता था।
परिजनों का कहना है कि पिछले कई दिनों से शिक्षक अत्यधिक कार्यभार और मानसिक दबाव में थे। लगातार काम और आराम न मिलने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर कार्य के दबाव को लेकर कोई राहत नहीं दी गई।
और पढ़ें: ओडिशा में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल, बीजेडी सांसद सुलता देव का केंद्र-राज्य सरकार पर हमला
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले की जानकारी ली है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
इस घटना ने क्षेत्र में प्रशासनिक कार्य प्रणाली और कर्मचारियों पर डाले जाने वाले कार्यभार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यों में लगे कर्मचारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे उनकी सेहत प्रभावित हो रही है।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले की जांच कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या वास्तव में मौत का कारण कार्य का दबाव था या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या।
इस दुखद घटना के बाद शिक्षक समुदाय में शोक की लहर है और कई संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
और पढ़ें: निशिकांत दुबे ने बीजू पटनायक पर की गई टिप्पणी के लिए माफी मांगी