जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सिंधु जल संधि को रद्द रखने का समर्थन करते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से इस संधि के कारण अपने ही नदी जल संसाधनों का पूरी तरह उपयोग नहीं कर सका।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान अक्सर कश्मीर के लोगों का बड़ा हितैषी होने का दावा करता है, लेकिन जब पानी के अधिकार की बात आती है तो उसकी चिंता कहां चली जाती है। उन्होंने सवाल किया कि जब भारत के अपने नदियों के पानी के इस्तेमाल के अधिकार सीमित किए गए, तब पाकिस्तान ने इसकी चिंता क्यों नहीं की।
उन्होंने कहा कि छह नदियों में से तीन नदियां, जो पंजाब से होकर बहती हैं, भारत के हिस्से में रहीं, जबकि अन्य तीन नदियों का पानी पाकिस्तान को मिला। उनके अनुसार, सिंधु जल संधि के कारण जम्मू-कश्मीर को लंबे समय तक नुकसान उठाना पड़ा।
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उमर ने कहा कि भारत चिनाब नदी से पर्याप्त पेयजल नहीं निकाल सका, तुलबुल परियोजना के तहत झेलम नदी के पानी का सिंचाई के लिए इस्तेमाल नहीं कर सका और न ही बड़ी जल परियोजनाओं के जरिए पानी का भंडारण एवं नियंत्रण कर सका। उन्होंने कहा कि अब जब संधि रद्द हो चुकी है, तो इसे रद्द ही रहना चाहिए, ताकि भारत अपने जल संसाधनों का उचित इस्तेमाल कर सके।
राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने जंतर-मंतर के प्रदर्शन को केवल शुरुआत बताते हुए कहा कि आगे कई विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य का दर्जा बहाल करने के वादे को याद दिलाते हुए इसे बेहद महत्वपूर्ण आश्वासन बताया।
सुखबीर बादल पर हमले की निंदा
उमर अब्दुल्ला ने सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने सवाल उठाया कि जेड-प्लस सुरक्षा के बावजूद बादल पर दूसरी बार हमला कैसे हुआ। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी शिकायत के कारण हिंसा का सहारा लेना स्वीकार्य नहीं है।
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