महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर ने हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने इस फैसले के पीछे की वजह भी बताई है।
ओमराजे निंबालकर ने कहा कि उनके पिता पवनराजे निंबालकर से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में न्याय दिलाने का आश्वासन उनके निर्णय का एक प्रमुख कारण रहा। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भरोसा दिलाया है कि उनके पिता के मामले में सीबीआई हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देगी और न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
सांसद ने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने व्यक्तिगत लाभ या धन के लिए पार्टी बदली है। उन्होंने कहा कि यदि उनका मकसद पैसा कमाना होता तो वे वर्ष 2022 में ही शिवसेना छोड़ देते। उन्होंने दावा किया कि उनका मुख्य उद्देश्य अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों को तेज गति देना है।
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एमपी फंड को लेकर उठे सवालों पर निंबालकर ने कहा कि 2019 से 2024 के बीच उन्हें उपलब्ध सांसद निधि का 100 प्रतिशत उपयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि धाराशिव संसदीय क्षेत्र में विकास की जरूरतें बहुत अधिक हैं और केवल सांसद निधि के जरिए सभी गांवों तक विकास पहुंचाना संभव नहीं है।
निंबालकर ने बताया कि उन्होंने यह फैसला अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से व्यापक चर्चा के बाद लिया। उनका मानना है कि सत्तारूढ़ पक्ष के साथ काम करने से विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।
गौरतलब है कि ओमराजे निंबालकर उन छह सांसदों में शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट का साथ दिया है। इसे महाराष्ट्र की राजनीति में शिंदे खेमे के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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