ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर पूर्व सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि भारत की सटीक सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने संघर्ष रोकने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने बेहद संतुलित और रणनीतिक तरीके से अपने लक्ष्य हासिल किए और लंबे युद्ध से बचते हुए आतंक के खिलाफ मजबूत संदेश दिया।
जयपुर में आयोजित साक्षात्कार में राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि “आत्मनिर्भर भारत” केवल नारा नहीं, बल्कि देश की रक्षा शक्ति का बड़ा आधार बन चुका है। उन्होंने बताया कि आज भारत के 65 प्रतिशत से अधिक रक्षा उपकरण देश में ही निर्मित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर नौ सटीक हमले किए गए।
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राजीव घई के अनुसार, इन हमलों में ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश प्रणाली, आधुनिक निगरानी तकनीक और स्वदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि भारत ने दुश्मन की कमांड और कंट्रोल प्रणाली को कमजोर कर दिया, जिससे पाकिस्तान बातचीत के लिए मजबूर हुआ।
उन्होंने यह भी बताया कि खुफिया एजेंसियों, साइबर यूनिट्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर टीमों ने ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति को संभालते हुए देश के भीतर सुरक्षा और भरोसा बनाए रखा।
पूर्व डीजीएमओ ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए एक आदर्श मॉडल साबित होगा, जिसमें संयुक्त रणनीति, तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की ताकत साफ दिखाई दी।
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