नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने गुरुवार को बताया कि बाढ़ के बाद लापता हुए करीब 800 लोगों में 300 से अधिक भारतीय नागरिक शामिल हैं। इस आपदा में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं।
शिशिर खनाल के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोगों के घर तबाह हो गए हैं और कई लोग अब भी लापता हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आपदा से हुए नुकसान का पूरा आकलन करने की कोशिश कर रही है। नेपाल में अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा अधिक रहता है और यह भारतीय पर्यटकों के बीच भी लोकप्रिय गंतव्य है।
इससे पहले खबर आई थी कि 750 से अधिक लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कम से कम 50 श्रद्धालु भी बताए गए थे।
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नेपाल स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है। प्रभावित भारतीयों और उनके परिजनों की सहायता के लिए +977-9851316807 और +977-9709107500 हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत की और भारत की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री और जरूरी चिकित्सा सामान भी भेजा है।
बाढ़ के बाद भारत के उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल से भारत की ओर आने वाली नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं।
केंद्रीय जल आयोग ने गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने की संभावना को लेकर सलाह जारी की है। अधिकारियों के अनुसार, अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारतीय और नेपाली एजेंसियां लगातार समन्वय कर लापता लोगों की तलाश और राहत-बचाव अभियान चला रही हैं।
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