ओडिशा के पारादीप पोर्ट को केंद्र सरकार ने ‘मेगा पोर्ट’ का दर्जा दिया है। यह दर्जा भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 के तहत दिया गया है और पारादीप पूर्वी तट का इस श्रेणी में शामिल होने वाला एकमात्र बंदरगाह है। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने 25 सितंबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। मंत्रालय के अनुसार, पारादीप पोर्ट ने अधिनियम की धारा 73 के तहत निर्धारित संरचनात्मक और परिचालन मानदंडों को पूरा किया है।
‘मेगा पोर्ट’ का दर्जा बंदरगाह की क्षमता, बुनियादी ढांचे और संचालन से जुड़े निर्धारित मानकों के आधार पर दिया जाता है। पारादीप बंदरगाह देश के प्रमुख समुद्री व्यापार केंद्रों में शामिल है। इसकी रणनीतिक स्थिति इसे पूर्वी भारत के औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण समुद्री प्रवेश द्वार बनाती है। पोर्ट की सुविधाओं के जरिए विभिन्न प्रकार के माल की आवाजाही और निर्यात-आयात गतिविधियों को संभाला जाता है।
सरकार की अधिसूचना के बाद पारादीप पोर्ट की राष्ट्रीय समुद्री परिवहन व्यवस्था में भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है। ‘मेगा पोर्ट’ का दर्जा मिलने से बंदरगाह के बुनियादी ढांचे के विकास, संचालन क्षमता बढ़ाने और समुद्री संपर्क को बेहतर बनाने पर ध्यान बढ़ सकता है। इससे पूर्वी तट के जरिए होने वाले व्यापार और माल परिवहन को भी समर्थन मिलने की संभावना है।
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पारादीप पोर्ट अथॉरिटी अपने कार्गो और परिचालन से जुड़े आंकड़े जारी करती है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बंदरगाह पर सितंबर 2026 में भी दैनिक यातायात और कार्गो गतिविधियों की निगरानी की जा रही थी। भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 केंद्र सरकार के बंदरगाह क्षेत्र से जुड़े कानूनी ढांचे का हिस्सा है। मंत्रालय ने इस कानून के तहत नियम भी अधिसूचित किए हैं।
पारादीप को मिला नया दर्जा ओडिशा के महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र और भारत के पूर्वी तट की बंदरगाह क्षमता के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
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