महाराष्ट्र के पारभणी में सोमवार को कथित रूप से आत्महत्या करने वाले दत्ता सोपन पवार की चिकित्सीय और अदालती रिकॉर्ड से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2024 में गिरफ्तारी से पहले ही पवार को अकोला के एक मनोचिकित्सक ने “आत्मघाती प्रवृत्ति” से ग्रसित और शराब की लत से पीड़ित बताया था। इसके अलावा, अदालत के रिकॉर्ड से यह भी पता चला है कि जेल में बिताए गए 13 महीनों के दौरान उनका मानसिक स्वास्थ्य उपचार पुणे के एक अस्पताल में कराया गया था।
दत्ता सोपन पवार को 10 दिसंबर 2024 को पारभणी में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा के पास संविधान की प्रतिकृति को कथित रूप से क्षतिग्रस्त करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस घटना के बाद शहर में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और एक पुलिस अधिकारी को निलंबित भी किया गया था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पवार को गिरफ्तार किए जाने से पहले मानसिक रूप से अस्थिर माना गया था और उनके इलाज से जुड़े दस्तावेज अदालत में भी पेश किए गए थे। जेल में रहने के दौरान उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं और समय-समय पर चिकित्सकीय निगरानी भी की गई।
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हाल ही में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था, लेकिन रिहाई के महज चार दिन बाद ही उनके द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबर सामने आई। इस घटना ने पुलिस हिरासत, जमानत के बाद निगरानी और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और पवार की मौत के पीछे की परिस्थितियों को समझने के लिए उनके मेडिकल रिकॉर्ड, जेल उपचार और हालिया गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।
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