संसद के 2026 के बजट सत्र में गुरुवार को कांग्रेस ने पूरे देश में एलपीजी सिलेंडर की कमी और बढ़ती ऊर्जा कीमतों को लेकर जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पैदा हुई ऊर्जा संकट से सबसे ज्यादा किसान प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि ईंधन और उर्वरक की कमी कृषि को प्रभावित कर रही है, वहीं एलपीजी की रेशनिंग से उपभोक्ताओं को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है और घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी 25 दिन तक लेट हो रही है।
खड़गे ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि युद्ध की जानकारी होने के बावजूद भारत ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखने में विफल रही। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य की ब्लॉकेज के कारण तेल, गैस और एलपीजी की आयात श्रृंखला प्रभावित हुई, जिससे कतर और अबू धाबी जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से आयात बाधित हुआ। इसके चलते किसानों, रेस्तरां और औद्योगिक सेक्टर पर भारी असर पड़ा। उन्होंने काला बाजारी, गेहूं और बासमती निर्यात में रुकावट, दवाओं की कीमतों में वृद्धि और वस्त्र, स्टील, विमान ईंधन, सिरेमिक, ग्लास, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर दबाव का हवाला दिया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान से असंतोष जताते हुए विपक्ष ने राज्यसभा में वॉकआउट और लोकसभा में विरोध प्रदर्शन किया। प्रियंका गांधी वाड्रा और अल्का लांबा ने आरोप लगाया कि बीजेपी की नीतियों के कारण कीमतें बढ़ रही हैं, बेरोजगारी बढ़ रही है और जनता पर बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने एलपीजी की कीमतों में तुरंत कटौती और तेल मंत्री हर्दीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग की।
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