सरकार के अनुसार, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने भारत में दवा, बल्क ड्रग्स और मेडिकल डिवाइस के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ आयात पर निर्भरता घटाने और नई तकनीक अपनाने में मदद की है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग की ये योजनाएं ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत विनिर्माण क्षमता मजबूत करने पर केंद्रित हैं।
फार्मा क्षेत्र के लिए तीन प्रमुख पीएलआई योजनाएं लागू की गई हैं। इनमें बल्क ड्रग्स पीएलआई, फार्मास्यूटिकल्स पीएलआई और मेडिकल डिवाइस के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली पीएलआई योजना शामिल हैं।
बल्क ड्रग्स में बढ़ी घरेलू क्षमता
2020 में मंजूर बल्क ड्रग्स पीएलआई के लिए 6,940 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया था। योजना के तहत 41 महत्वपूर्ण उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। कुल 48 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। जून 2026 तक 5,210.74 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका था, जबकि प्रतिबद्ध निवेश 4,330 करोड़ रुपये था।
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28 एपीआई और केएसएम बनाने वाली 39 परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड और रिफैम्पिसिन जैसे किण्वन आधारित उत्पादों का घरेलू उत्पादन भी शुरू हुआ है। जून 2026 तक लाभार्थी कंपनियों की संचयी बिक्री 3,792.49 करोड़ रुपये रही, जिसमें 560.16 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है। इससे करीब 5,127 लोगों को रोजगार मिला।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में कई परियोजनाओं ने महत्वपूर्ण दवा सामग्री के घरेलू उत्पादन में योगदान दिया है।
उच्च मूल्य वाली दवाओं पर जोर
2021 में मंजूर फार्मास्यूटिकल्स पीएलआई के लिए 15,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसके तहत बायोफार्मास्यूटिकल्स, जटिल जेनेरिक दवाएं, पेटेंट और ऑफ-पेटेंट दवाएं, ऑर्फन ड्रग्स तथा ऑटो-इम्यून दवाओं समेत कई उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
योजना के तहत 55 आवेदकों का चयन हुआ है, जिनमें 20 एमएसएमई हैं। जून 2026 तक 46,744 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ, जबकि लक्ष्य 17,275 करोड़ रुपये था। इस योजना से 1,21,294 रोजगार सृजित हुए। लाभार्थी कंपनियों की संचयी बिक्री 4,02,869 करोड़ रुपये रही, जिसमें 2,57,370 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है।
मेडिकल डिवाइस में आत्मनिर्भरता
मेडिकल डिवाइस पीएलआई को 2020 में 3,420 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ मंजूरी मिली। योजना के तहत भारत में निर्मित पात्र उपकरणों की अतिरिक्त बिक्री पर पांच साल तक पांच प्रतिशत प्रोत्साहन दिया जाता है।
इसके तहत एमआरआई मशीन, सीटी स्कैनर, कैथ लैब, लीनियर एक्सीलरेटर, सी-आर्म, मैमोग्राफी मशीन, अल्ट्रासाउंड प्रणाली और हार्ट वाल्व समेत 57 तरह के उपकरणों का उत्पादन शुरू हुआ है। जीई हेल्थकेयर, सीमेंस, फिलिप्स, वेरेक्स, निप्रो और ओमरोन जैसी वैश्विक कंपनियों ने भारत में विनिर्माण क्षमता स्थापित या विस्तारित की है।
सरकार के अनुसार, तीनों योजनाएं कच्चे माल और एपीआई से लेकर उच्च मूल्य वाली दवाओं और आधुनिक चिकित्सा तकनीक तक पूरी विनिर्माण श्रृंखला को जोड़ रही हैं। उत्पादन और बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन के जरिए ये योजनाएं आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने और भारत को फार्मा तथा मेडिकल डिवाइस विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद कर रही हैं।
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