प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक लंबी और महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। करीब साढ़े चार घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में मध्य पूर्व यानी खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह बैठक शाम 5 बजे ‘सेवा तीर्थ’ में शुरू हुई, जिसमें केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों और राज्य मंत्रियों ने भाग लिया। सरकार के शीर्ष स्तर पर हुई इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक आर्थिक स्थिति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
सूत्रों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, व्यापार मार्गों और भारत के आर्थिक हितों पर संभावित असर को लेकर चर्चा हुई। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा होता है, इसलिए सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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बैठक में विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं के साथ-साथ विभिन्न मंत्रालयों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को वर्तमान वैश्विक हालात और उससे जुड़े संभावित जोखिमों की जानकारी दी।
सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने को तैयार है। मंत्रिपरिषद की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और उसका असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक भारत की रणनीतिक और आर्थिक तैयारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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