प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल तीन से चार देशों के पास ही हाइड्रोजन ट्रेन संचालित करने की क्षमता है और भारत अब इस विशिष्ट सूची में शामिल हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की यह हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों में से एक है।
जींद से सोनीपत के बीच शुरू की गई यह ट्रेन शुरुआत में लगभग 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बेहद शांत और बिना झटकों के चली। इसकी परिचालन गति 75 किमी प्रति घंटा, जबकि डिजाइन गति 110 किमी प्रति घंटा है। 10 कोचों वाली यह ट्रेन अब तक विकसित हाइड्रोजन ट्रेनों में सबसे लंबी यात्री ट्रेनों में गिनी जा रही है। इसका 3,200 हॉर्स पावर (एचपी) का प्रोपल्शन सिस्टम इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जींद आना उनके लिए पुरानी यादों को ताजा करने जैसा है। उन्होंने बताया कि संगठनात्मक कार्यों के दौरान वह दशकों पहले पहली बार जींद आए थे और यहां के लोगों का स्नेह आज भी उन्हें याद है। उन्होंने जींद के प्रसिद्ध घी और घेवर का भी उल्लेख किया।
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यह ट्रेन पूरी तरह भारत में डिजाइन, विकसित और एकीकृत की गई है। इसमें स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है, जो भारतीय रेलवे की उन्नत इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है। ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा करती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है।
इस ट्रेन में हाइड्रोजन रिसाव, तापमान, आग और धुएं का पता लगाने वाली बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली भी लगाई गई है। हरित हाइड्रोजन आधारित यह तकनीक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में भारत का बड़ा कदम मानी जा रही है।
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