ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और दुनिया भर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने रथ यात्रा को भारत की सनातन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की उज्ज्वल अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि यह परंपरा विनम्रता, सामूहिक भागीदारी और निस्वार्थ सेवा का संदेश देती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "रथ यात्रा के पावन अवसर पर सभी को शुभकामनाएं। यह भारत की कालातीत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की उज्ज्वल अभिव्यक्ति है। रथ यात्रा से जुड़ी परंपराओं ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है।"
उन्होंने आगे भगवान महाप्रभु जगन्नाथ से सभी के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और समाज में आपसी भाईचारे की भावना मजबूत होने की प्रार्थना की। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश का समापन "जय जगन्नाथ" के उद्घोष के साथ किया।
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वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी देश और विदेश में रहने वाले भगवान जगन्नाथ के सभी भक्तों को रथ यात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह महापर्व भक्त और भगवान के मिलन का अद्भुत अवसर है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि मान्यता है कि इस पवित्र यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, चक्रराज सुदर्शन, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ स्वयं भक्तों के दर्शन के लिए बाहर आते हैं। उन्होंने देश की सुख-समृद्धि और निरंतर प्रगति की भी कामना की।
इधर, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार पर भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष, भगवान बलभद्र का तलध्वज और देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ तैयार कर दिया गया है। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।
रथ यात्रा के दौरान 13 हजार पुलिसकर्मी, केंद्रीय सशस्त्र बलों की 15 कंपनियां, एनएसजी कमांडो, भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल और समुद्र तट पर 500 लाइफगार्ड तैनात किए गए हैं। ओडिशा पुलिस ने भूमि, समुद्र और हवाई मार्ग से बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, सीसीटीवी और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की मदद से भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि रथ यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके।
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