नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए सोमनाथ मंदिर को भारत की शाश्वत सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव का सशक्त प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 11 वर्षों में देश में जो परिवर्तन देखने को मिला है, वह भारत के आत्मविश्वास और अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व का स्पष्ट संकेत है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनरुत्थान से लेकर राम जन्मभूमि के निर्माण तक की यात्रा यह दर्शाती है कि भारत अब एक आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में उभरा है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सम्मान के साथ अपनाता है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और आत्मसम्मान के पुनर्जागरण का प्रतीक है।
ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने अपने लेख में सोमनाथ को केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि देश की सामूहिक चेतना का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि इतिहास में बार-बार आक्रमणों और विनाश के बावजूद सोमनाथ मंदिर हर बार पुनर्निर्मित हुआ और भारत की सभ्यतागत शक्ति व जिजीविषा का प्रतीक बनकर खड़ा रहा।
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केंद्रीय मंत्री ने सिंधिया वंश के ऐतिहासिक योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1785 में उनके पूर्वज महाराजा महादजी सिंधिया ने लाहौर में मोहम्मद शाह अब्दाली को पराजित किया और सोमनाथ मंदिर के चांदी के द्वार भारत वापस लाए। सिंधिया ने इसे सदियों के अपमान के विरुद्ध एक सशक्त उत्तर बताया।
सिंधिया ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ सहित भारत की सांस्कृतिक विरासत को नया सम्मान, पहचान और राष्ट्रीय आत्मसम्मान की मजबूत आवाज मिली है। उन्होंने कहा कि आज भारत अपनी विरासत को संकोच नहीं, बल्कि गर्व के साथ विश्व के सामने प्रस्तुत कर रहा है।
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