जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद कहा कि यह परिणाम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अहंकार के खिलाफ जनता का स्पष्ट जनादेश है। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर के मतदाताओं ने जाति और सांप्रदायिक राजनीति से ऊपर उठकर बदलाव के पक्ष में मतदान किया है।
अपने पहले विस्तृत साक्षात्कार में प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर की जनता पारंपरिक राजनीतिक दलों का विकल्प चाहती थी और इसी कारण उसने जन सुराज पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा, "बांकीपुर की जनता ने अहंकार के खिलाफ मतदान किया है। लोगों ने जाति से ऊपर उठकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।"
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि भाजपा वर्षों से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का भय दिखाकर अपने पक्ष में वोटों का ध्रुवीकरण करती रही है, लेकिन इस बार मतदाताओं ने उस राजनीति को नकारते हुए जन सुराज को चुना।
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उन्होंने कहा कि बिहार में जनता अब केवल नारों या भावनात्मक मुद्दों के बजाय विकास और सुशासन चाहती है। उनके अनुसार, भाजपा के स्थानीय नेतृत्व में अत्यधिक आत्मविश्वास और अहंकार आ गया था। पार्टी को लगता था कि वह किसी भी उम्मीदवार को टिकट देकर चुनाव जीत सकती है, लेकिन बांकीपुर की जनता ने इस सोच को खारिज कर दिया।
प्रशांत किशोर ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेता अपनी सरकार के कामकाज के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, हिंदुत्व और लालू प्रसाद यादव के नाम का सहारा लेकर चुनाव जीतने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि बांकीपुर का जनादेश जवाबदेही की मांग का संकेत है।
गौरतलब है कि प्रशांत किशोर ने अपने पहले चुनाव में भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों से हराया। उन्हें 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 44,827 वोट प्राप्त हुए। राजद की उम्मीदवार रेखा गुप्ता तीसरे स्थान पर रहीं।
इस जीत को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जन सुराज पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
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