राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार (23 जनवरी, 2026) को राष्ट्रपति भवन में ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्घाटन किया। ‘ग्रंथ कुटीर’ को एक विशेष पुस्तकालय और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत की प्राचीन और समृद्ध साहित्यिक परंपरा को संरक्षित करना और आम जनता के सामने प्रस्तुत करना है।
ग्रंथ कुटीर (बुक हाउस) में भारत की 11 शास्त्रीय भाषाओं में लिखी गई पांडुलिपियों और पुस्तकों का समृद्ध संग्रह मौजूद है। इनमें तमिल, संस्कृत, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया, मराठी, पालि, प्राकृत, असमिया और बंगाली जैसी भाषाएं शामिल हैं। यह संग्रह भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
उद्घाटन के अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि ग्रंथ कुटीर भारत की ज्ञान परंपरा का प्रतीक है और यह आने वाली पीढ़ियों को देश की बौद्धिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियां और प्राचीन ग्रंथ केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि वे आज के समाज को दिशा देने और भविष्य को समझने में भी सहायक हैं।
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राष्ट्रपति भवन प्रशासन के अनुसार, ग्रंथ कुटीर को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि शोधार्थी, विद्यार्थी और साहित्य प्रेमी यहां आकर अध्ययन कर सकें। इसके माध्यम से भारतीय दर्शन, इतिहास, विज्ञान, साहित्य और संस्कृति से जुड़े दुर्लभ ग्रंथों तक पहुंच आसान होगी।
इस पहल को भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्रंथ कुटीर न केवल ज्ञान का केंद्र बनेगा, बल्कि यह भारत की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त रूप से सामने लाएगा।
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