राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बैतूल में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। यह कार्यक्रम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा “आध्यात्मिक जागरण से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” विषय पर आयोजित किया गया था।
राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समाज में आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यक्तिगत सशक्तिकरण को बढ़ावा देना था। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर जनजातीय समुदायों के विकास और उनके उत्थान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज देश की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आत्मिक जागरण व्यक्ति को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है और सामाजिक समरसता को मजबूत करता है।
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कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी संस्था के प्रतिनिधियों ने भी आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्था लंबे समय से देश और दुनिया में शांति, सद्भाव और आत्मिक विकास के लिए कार्य कर रही है।
बैतूल में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने राष्ट्रपति के विचारों को प्रेरणादायक बताया और जनजातीय विकास के लिए ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण माना।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और जागरूकता के साथ-साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहल भी सामाजिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राष्ट्रपति के इस कार्यक्रम में शामिल होने को जनजातीय समाज के उत्थान और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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