भारतीय नौसेना के निवर्तमान प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने आने वाले दशक के लिए नौसेना का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्रतीक्षित प्रोजेक्ट 75(I) के तहत पहली पनडुब्बी वर्ष 2033 तक नौसेना के बेड़े में शामिल होने की संभावना है। यह परियोजना भारत की पनडुब्बी क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार, इस परियोजना में अत्याधुनिक तकनीक जैसे एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) प्रणाली के हस्तांतरण पर भी काम किया जा रहा है, जिससे पनडुब्बियों की क्षमता और संचालन अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे भारतीय नौसेना को अधिक लंबी दूरी तक और अधिक समय तक पानी के भीतर रहने की क्षमता प्राप्त होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य की नौसेना केवल पारंपरिक मानव-संचालित प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्रू (मानव-चालित) और अनक्रू (मानवरहित) दोनों प्रकार की प्रणालियों के मिश्रण पर आधारित होगी। इससे नौसेना की युद्ध क्षमता, निगरानी और रणनीतिक संचालन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
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प्रोजेक्ट 75(I) को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रमुख कार्यक्रम माना जा रहा है। इसके तहत उन्नत तकनीक से लैस नई पीढ़ी की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा, जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारतीय महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगी और देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगी।
नौसेना प्रमुख ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में तकनीकी सहयोग, स्वदेशी निर्माण और आधुनिक युद्ध प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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