राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद स्थित अपने कार्यालय में किसानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उनकी चिंताओं को सुना। इस बैठक के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “स्टेज-मैनेज्ड” और “भ्रामक” बताया।
बैठक में देशभर के 17 प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। किसान नेताओं ने आशंका जताई कि यह व्यापार समझौता खासतौर पर मक्का, सोयाबीन, कपास, फल उगाने वाले किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों की आय पर असर डाल सकता है और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा कमजोर कर सकता है। किसान संगठनों ने इस समझौते के विरोध में देशव्यापी आंदोलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बीजेपी ने बैठक की तस्वीर साझा करते हुए दावा किया कि इसमें मौजूद कई लोग हरियाणा और पंजाब के कांग्रेस नेता और सहयोगी दलों के कार्यकर्ता थे। पार्टी ने कहा कि यह किसानों की बैठक नहीं बल्कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सभा थी और राहुल गांधी किसानों को लेकर भ्रामक राजनीति कर रहे हैं।
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इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के दावों को “फर्जी” और “गढ़ा हुआ” बताया। उन्होंने कहा कि यह बैठक किसानों के बीच भ्रम फैलाने और सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास है। उनका कहना है कि सरकार ने भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे में किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा की है।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का उद्देश्य टैरिफ बाधाओं को कम करना और बाजार पहुंच बढ़ाना है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत तक करने पर सहमति जताई है, जिससे वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर और फार्मा क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि 90–95 प्रतिशत कृषि उत्पाद इस समझौते से बाहर रखे गए हैं।
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