कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला करते हुए इसे “दुनिया में मजाक” करार दिया है। उनका यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया है कि पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका के बीच संभावित वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हो गई है और वैश्विक मंच पर उसका प्रभाव घटा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मामलों में निर्णायक भूमिका निभाने में असफल रहा है, जिससे अन्य देश आगे आकर मध्यस्थता कर रहे हैं।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए इस्लामाबाद को संभावित स्थान के रूप में पेश किया है। हालांकि, ईरान ने प्रत्यक्ष वार्ता से इनकार किया है और स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
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राहुल गांधी के इस बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति “व्यक्तिगत” हो गई है और राष्ट्रीय हितों के बजाय राजनीतिक दृष्टिकोण से संचालित हो रही है।
वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत और संतुलित नीति अपना रहा है। सरकार का दावा है कि भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय संवाद और शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों में उतार-चढ़ाव के बीच कई देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में भारत की भूमिका और उसकी कूटनीतिक रणनीति पर राजनीतिक बहस तेज होना स्वाभाविक है।
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