कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वाराणसी की एक अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। यह मामला उस एफआईआर से जुड़ा है, जिसे उनके खिलाफ 2024 के अमेरिका दौरे के दौरान सिख समुदाय को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान पर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
राहुल गांधी का कहना है कि वाराणसी की अदालत ने पर्याप्त सबूतों और तथ्यों पर विचार किए बिना एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया, जो न्यायिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने हाई कोर्ट से अनुरोध किया है कि निचली अदालत के इस आदेश को निरस्त किया जाए।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 2024 में अमेरिका यात्रा के दौरान कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाषण दिए थे। इन्हीं में से एक बयान को लेकर शिकायत दर्ज हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि यह सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला था। शिकायतकर्ता ने वाराणसी अदालत में याचिका दाखिल कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, जिस पर अदालत ने पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश दिया।
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राहुल गांधी के वकीलों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और इसका उद्देश्य राहुल गांधी की छवि धूमिल करना है। उन्होंने यह भी दलील दी कि उनके भाषण को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है।
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