राजस्थान के टोंक जिले के सीदड़ा गांव में ‘प्राचीन घड़े’ में छिपे खजाने की अफवाह ने गांव से लेकर प्रशासन तक में हलचल मचा दी, लेकिन कुछ ही समय में यह सनसनीखेज दावा पूरी तरह झूठा साबित हो गया। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
जयपुर से करीब दो घंटे दक्षिण स्थित सीदड़ा गांव में शनिवार को चरागाह की जमीन पर गुलाब की पंखुड़ियां, अगरबत्तियां और पूजा से जुड़ा अन्य सामान दिखाई दिया। मवेशी चराने वालों ने इसकी जानकारी गांव वालों को दी। देखते ही देखते यह अफवाह फैल गई कि जमीन के नीचे कोई रहस्यमय या प्राचीन वस्तु दबी हुई है। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए।
खजाने की चर्चाओं के बीच स्थानीय प्रशासन भी सतर्क हो गया और जिला प्रशासन के अधिकारी शनिवार शाम को मौके पर पहुंचे। हालात की गंभीरता को देखते हुए जेसीबी मशीनें मंगाई गईं और खुदाई शुरू कराई गई। कुछ लोगों का यह भी कहना था कि वहां किसी शव या भ्रूण के दबे होने की आशंका है, इसलिए प्रशासन ने एहतियातन खुदाई कराई।
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काफी मशक्कत के बाद खेत से एक घड़ा निकाला गया। जैसे ही यह खबर फैली कि जमीन से घड़ा मिला है, लोगों में खजाना निकलने की उम्मीद और बढ़ गई। लेकिन जब घड़े को खोला गया, तो उसमें न तो सोना मिला, न चांदी और न ही कोई कीमती वस्तु। पूरा मामला महज अफवाह और साजिश निकला।
जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर पूजा सामग्री रखकर रहस्य और खजाने की कहानी गढ़ी थी, ताकि गांव में सनसनी फैलाई जा सके। पुलिस ने मामले की तह तक जाते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है।
यह घटना दिखाती है कि किस तरह अफवाहें और अंधविश्वास ग्रामीण इलाकों में बड़ी भीड़ और प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी का कारण बन सकते हैं।
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