दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की चार्जशीट में कई अहम खुलासे किए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, लाल किले के पास हुआ धमाका सुसाइड बॉम्बिंग था और डॉक्टर उमर उन नबी विस्फोट करने वाले व्यक्ति के तौर पर सामने आया है। एनआईए ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
चार्जशीट के अनुसार, धमाके में इस्तेमाल की गई हुंडई आई20 कार को वाहन आधारित विस्फोटक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया गया था। जांच में सामने आया है कि धमाके के समय उमर उन नबी कार के अंदर मौजूद था। घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों की डीएनए जांच के आधार पर उसकी पहचान किए जाने का दावा किया गया है।
एनआईए ने कार और घटनास्थल से मिले मलबे की फोरेंसिक जांच में विस्फोटक पदार्थों के अवशेष मिलने की बात कही है। जांच एजेंसी के मुताबिक, विभिन्न प्रयोगशालाओं में किए गए परीक्षणों में टीएटीपी समेत अन्य रासायनिक पदार्थों की मौजूदगी की पुष्टि हुई। एजेंसी का कहना है कि ये निष्कर्ष विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री की पहचान करने में महत्वपूर्ण हैं।
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चार्जशीट में एक कमांड मैकेनिज्म का भी उल्लेख है, जिसे घटनास्थल के पास से बरामद किया गया था। एनआईए के अनुसार, यह उपकरण विस्फोटक को सक्रिय करने की व्यवस्था से जुड़ा अहम सबूत है।
जांच में नौगाम पुलिस स्टेशन केस नंबर 162/2025 का भी जिक्र किया गया है। आरोपियों के ठिकानों से विस्फोटक तैयार करने से जुड़ी सामग्री और उपकरण बरामद होने की बात कही गई है। इन्हीं सामग्रियों की जांच के दौरान 14 नवंबर 2025 को नौगाम थाने के परिसर में धमाका हुआ था, जिसमें पुलिसकर्मियों समेत कई लोगों की मौत और घायल होने की बात चार्जशीट में दर्ज है।
चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि जासीर बिलाल वानी ने ऑनलाइन माध्यमों से रॉकेट संबंधी जानकारी हासिल की थी और उसे ड्रोन भी उपलब्ध कराए गए थे।
इसके अलावा, शाहीन सईद के पेन ड्राइव से 87 तस्वीरें मिलने का उल्लेख है। इनमें कुछ आरोपियों की हथियारों के साथ तस्वीरें थीं। एनआईए ने आरोपियों के कथित संबंध अंसार गजवात-उल-हिंद और एक्यूआईएस जैसे आतंकी संगठनों से भी जोड़े हैं।
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