प्रसिद्ध पारिस्थितिकीविद् माधव गाडगील का बुधवार (7 जनवरी 2026) देर रात पुणे स्थित अपने आवास पर एक संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके बेटे सिद्धार्थ गाडगील ने यह जानकारी The Indian Witness को गुरुवार (8 जनवरी 2026) को दी। माधव गाडगील की उम्र 82 वर्ष थी।
गाडगील अपने समय के जाने-माने पर्यावरणविद् थे और उन्हें विशेष रूप से पश्चिमी घाटों की पारिस्थितिकीय महत्ता पर उनके कार्यों के लिए जाना जाता था। उनके काम ने भारत के प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
गाडगील ने न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बल्कि नीति निर्माण और पर्यावरण संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उनका शोध और उनके सुझाव सरकार और समाज दोनों के लिए पर्यावरण संरक्षण में मार्गदर्शन का काम करते रहे।
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उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को दोपहर 4 बजे पुणे के वैकुंठ श्मशान भूमि में संपन्न होगा। उनके निधन से पारिस्थितिकी और पर्यावरण अध्ययन के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति हुई है।
माधव गाडगील की स्मृति उनके योगदान, शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से सदैव जीवित रहेगी। उनके विचार और शोध आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।
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