देश में 1 जून से लागू हुए नए सोलर नियमों के बाद रूफटॉप सोलर पैनल लगवाना महंगा हो सकता है। केंद्र सरकार ने घरेलू सौर विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयातित सोलर सेल, खासकर चीन से आने वाले उत्पादों पर निर्भरता कम करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नए नियमों के अनुसार, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत सब्सिडी और नेट मीटरिंग का लाभ लेने के लिए केवल उन्हीं सोलर पैनलों का उपयोग किया जा सकेगा जो नई एएलएमएम (Approved List of Models and Manufacturers) सूची-2 में शामिल कंपनियों द्वारा निर्मित हों। इसके अलावा, इन पैनलों में इस्तेमाल होने वाले सोलर सेल भी भारत में निर्मित और सरकार द्वारा अनुमोदित कंपनियों के होने चाहिए।
सरकार का मानना है कि भारत में सोलर मॉडल निर्माण क्षमता लगभग 200 गीगावाट प्रति वर्ष है, लेकिन सोलर सेल निर्माण क्षमता अभी केवल 30 गीगावाट के आसपास है। ऐसे में नई नीति से घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
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हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से सोलर सिस्टम की लागत बढ़ सकती है। अनुमान है कि प्रति किलोवाट करीब 3,000 रुपये अतिरिक्त खर्च आएगा। इसका मतलब है कि 3 किलोवाट का सिस्टम लगभग 9,000 रुपये और 5 किलोवाट का सिस्टम करीब 15,000 रुपये महंगा हो सकता है।
फिर भी सरकार की सब्सिडी योजना उपभोक्ताओं को राहत देती रहेगी। योजना के तहत 1 किलोवाट सिस्टम पर 30,000 रुपये, 2 किलोवाट पर 60,000 रुपये और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर 78,000 रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध है। इसके अलावा, लाभार्थियों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ भी मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती लागत बढ़ने के बावजूद यह कदम भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू सौर उद्योग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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