सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोने की चोरी के मामले में एक वरिष्ठ पुजारी की गिरफ्तारी ने केरल की राजनीति में हलचल मचा दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और दक्षिणपंथी संगठनों ने इस कार्रवाई को साजिश करार देते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए सीपीआई(एम) और कांग्रेस से जुड़े नेताओं को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिनका नाम कथित तौर पर इस घोटाले से जुड़ा है।
विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने इस सप्ताह सबरीमाला के सबसे वरिष्ठ तंत्री (मुख्य पुजारी) कंदरारू राजीवरु को 2019 में मंदिर की स्वर्ण आभूषणों से जुड़े कथित गबन के मामले में गिरफ्तार किया। राजीवरु थाझामोन परिवार से संबंध रखते हैं, जिनके सदस्य पारंपरिक रूप से सबरीमाला मंदिर में पुजारी की भूमिका निभाते रहे हैं। इस मामले में वह पहले पुजारी हैं जिनकी गिरफ्तारी हुई है।
पिछले तीन महीनों में जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, वे या तो त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी थे या फिर सीपीआई(एम) के वे नेता थे, जिन्होंने अतीत में बोर्ड की अध्यक्षता की थी। अब एक वरिष्ठ पुजारी की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष ने इसे राजनीतिक मोड़ देने का आरोप लगाया है।
और पढ़ें: सबरीमाला सन्निधानम में चोरी, एक कर्मचारी गिरफ्तार
बीजेपी का कहना है कि यह गिरफ्तारी असली दोषियों से ध्यान हटाने के लिए की गई है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सोने की चोरी में शामिल वामपंथी और कांग्रेस नेताओं को बचाने के लिए जानबूझकर पुजारी को निशाना बनाया गया। बीजेपी ने इस मुद्दे पर राज्यभर में विरोध प्रदर्शन करने की योजना भी बनाई है।
वहीं, वामपंथी दलों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को भी उसके पद या धार्मिक भूमिका के आधार पर छूट नहीं दी जा सकती। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।
और पढ़ें: यूपी में मांस विक्रेता ने पालतू कुत्ते की चाकू मारकर हत्या की, आरोपी गिरफ्तार