महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सचिन अहीर ने शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। शिंदे गुट में शामिल होते ही सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए शिवसेना उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया।
सचिन अहीर का यह कदम ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसद भी शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। इसे पार्टी विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे खेमे के लिए सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में से एक माना जा रहा है।
शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में यवतमाल से संजय देशमुख, परभणी से संजय जाधव, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दीना पाटिल, हिंगोली से नागेश पाटिल-अष्टीकर, धाराशिव से ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और शिर्डी से भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं।
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इन सभी नेताओं ने औपचारिक रूप से दक्षिण मुंबई स्थित यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान शिंदे ने अपनी राजनीतिक रणनीति 'ऑपरेशन टाइगर' को पूरी तरह सफल बताते हुए कहा कि उनका अभियान अब सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
उन्होंने इन नेताओं को जमीनी स्तर से जुड़े अनुभवी जनप्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उनके आने से पार्टी और मजबूत होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र में नौ सीटें जीती थीं। अब छह सांसदों और एक एमएलसी के शिंदे गुट में जाने से पार्टी की ताकत काफी कमजोर हुई है। वहीं, इससे महायुति गठबंधन में एकनाथ शिंदे की राजनीतिक स्थिति और सौदेबाजी की क्षमता भी मजबूत होने की संभावना है।
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