भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी सोमवार को लगभग सपाट रुख के साथ मामूली बढ़त में बंद हुए। कारोबार के अधिकांश समय बाजार सीमित दायरे में रहा। निवेशकों में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए संभावित समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी रही। इसके कारण बाजार में सतर्कता देखने को मिली।
निफ्टी 13.15 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,583.80 अंक पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 प्रतिशत चढ़कर 78,542.44 अंक पर पहुंच गया। चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार को सकारात्मक बनाए रखा, हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एफएमसीजी शेयरों में कमजोरी ने बढ़त सीमित कर दी।
और पढ़ें: असम में बाढ़ से मृतकों की संख्या 100 पहुंची, करीब 1.4 लाख लोग अब भी प्रभावित
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,600 से 24,700 अंक का स्तर तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है। यदि सूचकांक 24,700 के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट देता है, तो खरीदारी की गति मजबूत हो सकती है और निफ्टी 24,800 के स्तर की ओर बढ़ सकता है।
वहीं, 24,500 अंक को तत्काल और महत्वपूर्ण समर्थन स्तर माना जा रहा है। इसके नीचे निर्णायक गिरावट आने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और निफ्टी 24,400 से 24,300 के क्षेत्र तक जा सकता है।
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में भारतीय स्टेट बैंक, आईटीसी और इटरनल कमजोर रहे। व्यापक बाजार में मिला-जुला रुख रहा। निफ्टी मिडकैप सूचकांक 0.62 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.27 प्रतिशत गिर गया।
क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी पीएसयू बैंक करीब 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर रहा। निफ्टी फार्मा और निफ्टी एफएमसीजी भी नीचे बंद हुए। इसके विपरीत, रियल एस्टेट शेयरों में खरीदारी रही और निफ्टी रियल्टी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र बना।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर उनके संभावित प्रभाव को लेकर निवेशक फिलहाल इंतजार और निगरानी की रणनीति अपना रहे हैं। हालांकि, चालू सप्ताह में पहली तिमाही वित्त वर्ष 2026-27 के नतीजों का अंतिम दौर बाजार की दिशा और शेयर-विशेष गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
और पढ़ें: सरकारी ई-मार्केटप्लेस ने बदले सार्वजनिक खरीद के नियम: पीयूष गोयल