पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत में ऊर्जा की खपत बहुत अधिक है और इसका असर पहले ही आम लोगों पर दिखने लगा है।
थरूर ने कहा, “हमारी खपत बहुत ज्यादा है और यह पहले से ही हर किसी को प्रभावित कर रही है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे आर्थिक तंत्र को प्रभावित करता है। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश, जो तेल आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं, उन्हें ऐसे वैश्विक संकटों का सीधा सामना करना पड़ता है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
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थरूर ने सुझाव दिया कि सरकार को इस स्थिति से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनानी चाहिए। इसमें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना, ऊर्जा दक्षता में सुधार और आयात पर निर्भरता कम करना शामिल है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि तेल की कीमतों में यह तेजी जारी रही, तो इससे महंगाई दर बढ़ सकती है और आम नागरिकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
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