दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पुराने सरकारी आवास 6, फ्लैग स्टाफ रोड को लेकर ‘शीश महल’ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। दिल्ली विधानसभा की लोक लेखा समिति सोमवार दोपहर इस बंगले का निरीक्षण कर सकती है। समिति की अध्यक्षता बीजेपी विधायक अजय महावर कर रहे हैं।
समिति आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान बंगले में कराए गए निर्माण और नवीनीकरण कार्यों तथा सरकारी खजाने से हुए खर्च की जांच करेगी। यह निरीक्षण भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों के बाद प्रस्तावित है।
सीएजी रिपोर्ट में क्या कहा गया?
सीएजी के अनुसार, बंगले के नवीनीकरण की शुरुआती अनुमानित लागत 7.91 करोड़ रुपये थी, जबकि 2020 में इसका ठेका 8.62 करोड़ रुपये में दिया गया। लोक निर्माण विभाग द्वारा 2022 में काम पूरा होने तक इसकी लागत बढ़कर 33.66 करोड़ रुपये हो गई। यानी शुरुआती अनुमान की तुलना में खर्च में करीब 342 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
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रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ‘बेहतर गुणवत्ता’, कलात्मक, प्राचीन और सजावटी वस्तुओं पर 18.88 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा बंगले का निर्मित क्षेत्र 1,397 वर्ग मीटर से बढ़कर 1,905 वर्ग मीटर हो गया।
समिति नवीनीकरण से जुड़े दस्तावेजों, मंजूरियों और रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। साथ ही सीएजी की आपत्तियों पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
बीजेपी और आप में फिर वार-पलटवार
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने रविवार को बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि निरीक्षण के दौरान कथित ‘सोने का कमोड’, स्विमिंग पूल और शराब का बार दिखाया जाए। आप ने मीडिया को निरीक्षण में शामिल करने और दौरे की तस्वीरें व वीडियो सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
आप का आरोप है कि बीजेपी ने बंगले को लेकर बिना ठोस आधार के राजनीतिक अभियान चलाया। वहीं बीजेपी लगातार केजरीवाल पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और महंगे नवीनीकरण को लेकर निशाना साधती रही है।
2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में ‘शीश महल’ मुद्दा बीजेपी के प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल था। बीजेपी ने 48 सीटें जीतीं, जबकि आप 22 सीटों पर सिमट गई।
केजरीवाल ने अक्टूबर 2024 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद यह सरकारी आवास खाली कर दिया था।
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