पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को कहा कि वह जल्द ही बांग्लादेश लौटने का संकल्प रखती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि वापसी पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या जेल भेजा जा सकता है, लेकिन डर उनके कर्तव्य को तय नहीं कर सकता।
दिल्ली में मीडिया से वर्चुअल बातचीत के दौरान शेख हसीना ने कहा कि उनकी वापसी का उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं है, बल्कि बांग्लादेश को फिर से विकास और धर्मनिरपेक्षता के रास्ते पर लाना है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन बांग्लादेश के लोगों के साथ बिताया है और देश से दूर होने के बावजूद वह अपने लोगों से कभी अलग नहीं हुईं।
शेख हसीना ने कहा कि पिछले दो वर्षों से वह अपने प्रिय बांग्लादेश को पीड़ित होते देख रही हैं। उन्होंने कहा कि यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे उन्होंने बनाया था और न ही वह देश है जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने बलिदान दिया था।
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उन्होंने जुलाई-अगस्त 2024 में हुए विरोध प्रदर्शनों पर भी अपनी बात रखी। शेख हसीना ने दावा किया कि यह केवल शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था, बल्कि संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदल दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने शुरुआत में बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के माध्यम से समस्या सुलझाने की कोशिश की थी।
पूर्व प्रधानमंत्री ने मुहम्मद यूनुस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यूनुस के बयानों से पता चलता है कि आंदोलन पूरी योजना के तहत चलाया गया था और इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया से बाहर सत्ता हासिल करना था।
इस दौरान शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने भी मीडिया से बातचीत की। उन्होंने 2024 के प्रदर्शनों में हुई मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभिन्न संस्थाओं द्वारा अलग-अलग संख्या बताई गई है और इस मामले में स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।
शेख हसीना ने कहा कि आज बांग्लादेश में डर का माहौल घरों, कार्यस्थलों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंच गया है। उन्होंने दोहराया कि वह देश लौटने से पीछे नहीं हटेंगी और अपने लोगों के प्रति जिम्मेदारी निभाती रहेंगी।
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