हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में नेशनल हाईवे की फोरलेनिंग के लिए चल रही टनलिंग से करीब 10 मकानों में दरारें आने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी जीवनभर की जमा पूंजी से बने घरों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित कंपनी के कर्मचारी मौके पर पहुंचे हैं। शिमला के उपायुक्त ने काम बंद करने के आदेश दिए हैं। प्रभावित मकानों पर सुरक्षा दीवारें लगाने और जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। हालांकि, स्थानीय निवासी अंशुल चौहान और रमेश चंद ठाकुर ने इन इंतजामों को अपर्याप्त बताया है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही और निर्धारित मानकों की अनदेखी की जा रही है।
शांति विहार वार्ड के पार्षद विनीत शर्मा और कमला नगर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने भी लोगों की सुरक्षा पर चिंता जताई है। उन्होंने क्षतिग्रस्त भवनों का अधिग्रहण कर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।
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वहीं, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कहा कि परियोजना में इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार सावधानियां बरती गई हैं। प्रभावित स्थानों पर ग्राउटिंग, स्ट्रक्चरल रेट्रोफिटिंग, दरारों की सीलिंग और अन्य मरम्मत कार्य किए गए हैं। एनएचएआई के मुताबिक टनल निर्माण से जुड़ी ब्लास्टिंग नवंबर 2025 में ही बंद कर दी गई थी और उसके बाद कोई ब्लास्टिंग नहीं हुई।
कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि संजौली, भट्टाकुफर और ढली क्षेत्रों में टनल निर्माण से कई मकानों में बड़ी दरारें आई हैं। उन्होंने करीब 13-14 इमारतों के प्रभावित होने का दावा करते हुए निर्माण में घटिया काम के आरोप लगाए और लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
इससे पहले सोलन जिले में कालका-शिमला रेलवे रूट पर भूस्खलन के कारण 400 से अधिक यात्रियों को बचाया गया था और 10 ट्रेनें रद्द करनी पड़ी थीं।
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