कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में मौसम आधारित फसल बीमा योजना (2026-27) को लेकर किसानों के बीच संशय की स्थिति बनी हुई है। बड़ी संख्या में किसानों ने योजना में पंजीकरण कराने से पहले जिला प्रशासन से वर्षामापी यंत्रों (रेन गेज) की स्थिति और उनकी कार्यक्षमता को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
किसानों की चिंता का मुख्य कारण वर्ष 2024-25 के दौरान फसल नुकसान के बदले मिले मुआवजे में सामने आई भारी विसंगतियां हैं। किसानों का आरोप है कि कई क्षेत्रों में वर्षा के आंकड़े सही तरीके से दर्ज नहीं किए गए, जिसके कारण वास्तविक नुकसान के अनुरूप मुआवजा नहीं मिल सका। उनका मानना है कि खराब या त्रुटिपूर्ण वर्षामापी यंत्रों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर बीमा दावों का आकलन किया गया, जिससे अनेक किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।
इसी पृष्ठभूमि में किसान यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आगामी मौसम आधारित फसल बीमा योजना में उपयोग किए जाने वाले वर्षामापी यंत्र पूरी तरह कार्यशील और सटीक हों। उनका कहना है कि यदि वर्षा रिकॉर्डिंग प्रणाली में खामियां बनी रहीं तो बीमा योजना का लाभ वास्तविक पात्र किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा।
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उधर, उद्यानिकी विभाग ने जिले में मौसम आधारित फसल बीमा योजना के लिए विशेष पंजीकरण अभियान शुरू किया है। इस योजना के तहत जिलेभर में सुपारी, काली मिर्च और अदरक की फसलों को बीमा सुरक्षा प्रदान की जाएगी। वहीं शिवमोग्गा, सोराब और शिकारीपुर तालुकों में आम की फसल को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है।
विभाग ने किसानों से समय रहते पंजीकरण कराने की अपील की है। योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को 31 जुलाई तक अपने हिस्से का प्रीमियम जमा करना होगा। हालांकि किसान चाहते हैं कि प्रशासन पहले वर्षामापी यंत्रों की स्थिति स्पष्ट करे ताकि भविष्य में मुआवजे को लेकर किसी प्रकार का विवाद न हो।
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