कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ग्रेट निकोबार द्वीप में चल रही विकास परियोजना को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख का समर्थन करते हुए इस परियोजना पर बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई और स्थानीय समुदायों से परामर्श न किए जाने का आरोप लगाया है।
सिद्धारमैया ने कहा कि जब किसी परियोजना का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हों, तो उसे आगे बढ़ाने का औचित्य क्या है। उन्होंने सवाल उठाया कि विकास के नाम पर पर्यावरण और जनहित को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर वर्षावनों (रेनफॉरेस्ट) की कटाई की जा रही है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए स्थानीय आदिवासी समुदायों से पर्याप्त बातचीत या परामर्श नहीं किया गया है।
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सिद्धारमैया ने कहा कि किसी भी विकास परियोजना को लागू करने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय लोगों की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना विचार-विमर्श के ऐसे निर्णय लंबे समय में गंभीर परिणाम दे सकते हैं।
इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कांग्रेस पहले ही इस परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठा चुकी है, जबकि सरकार की ओर से इसे रणनीतिक और विकासात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच भी इस परियोजना को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ इसे आर्थिक विकास के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि अन्य इसे पर्यावरण और जनजातीय अधिकारों के लिए खतरा बता रहे हैं।
इस विवाद ने एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस को तेज कर दिया है।
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