कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से मलयालम भाषा विधेयक 2025 को वापस लेने का आग्रह किया है। यह अपील ऐसे समय में की गई है जब कर्नाटक सीमा क्षेत्र विकास प्राधिकरण के एक प्रतिनिधिमंडल ने एक दिन पहले केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर इस विधेयक को खारिज करने का अनुरोध किया था।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को कहा कि यह विधेयक केरल में रहने वाले कन्नड़-भाषी भाषाई अल्पसंख्यकों के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रस्तावित कानून से इन समुदायों के संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
सिद्धारमैया ने इस विधेयक को संविधान द्वारा संरक्षित भाषाई स्वतंत्रता पर “हमला” करार दिया। उन्होंने कहा, “हमें यह उम्मीद नहीं थी कि केरल की कम्युनिस्ट सरकार भाषाई अल्पसंख्यकों के मूल अधिकारों को कुचलने वाला कदम उठाएगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही प्रशासनिक रूप से कासरगोड जिला केरल का हिस्सा है, लेकिन भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से उसका गहरा जुड़ाव कर्नाटक से है।
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कर्नाटक सरकार का मानना है कि मलयालम भाषा विधेयक 2025 लागू होने की स्थिति में केरल में रहने वाले कन्नड़-भाषी नागरिकों को शिक्षा, प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं में भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है। इसी आशंका को लेकर कर्नाटक सीमा क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने केरल सरकार के समक्ष औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि भारत की विविधता उसकी भाषाई बहुलता में निहित है और किसी भी राज्य को ऐसे कानून नहीं बनाने चाहिए जो अल्पसंख्यक समुदायों की पहचान और अधिकारों को कमजोर करें। उन्होंने केरल सरकार से इस विधेयक पर पुनर्विचार करने और सभी भाषाई समुदायों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
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