लद्दाखी कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने मंगलवार, 17 मार्च 2026 को अपनी रिहाई के बाद पहली बार बातचीत में बताया कि उन्हें “जबरन उठाकर जेल में डाल दिया गया” और लगभग दस दिन तक परिवार और कानूनी टीम से संपर्क नहीं होने दिया गया।
सोनम वांगचुक को जोधपुर केंद्रीय जेल से शनिवार, 14 मार्च 2026 को रिहा किया गया। इसके पहले केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने तत्काल प्रभाव से उनके 170 दिनों के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत लगाए गए हिरासत आदेश को रद्द कर दिया था।
वांगचुक को पिछले साल राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था, जब उन्होंने लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत विशेष अधिकार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस ने उस प्रदर्शन के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था।
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रिहाई के बाद वांगचुक ने कहा कि सरकार और आम जनता को दोनों पक्षों के मांगों में लचीलापन दिखाना होगा। उन्होंने बताया, “बातचीत एक दो-तरफ़ा प्रक्रिया है, दोनों पक्षों को लचीला और विचारशील होना चाहिए। संवाद को अनावश्यक रूप से लंबा खींचना सार्थक वार्ता में बाधा डाल सकता है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि संवाद की प्रक्रिया को खींचने से वास्तविक मुद्दों पर चर्चा और समाधान प्रभावित हो सकते हैं।
सोनम वांगचुक की यह बयान लद्दाख की राजनीतिक मांगों और स्थानीय अधिकारों पर जारी चर्चा में नई हलचल ला सकती है। उनकी रिहाई और बयान ने इस क्षेत्र के लोगों और सरकार के बीच संवाद की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है।
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